अंबेडकरनगर। 14 जुलाई, 2026
किछौछा दरगाह स्थित सूफी संत हजरत मखदूम अशरफ के 640 वें सालाना उर्स पर मंगलवार शाम को सज्जादानशीन व मुतवल्ली सै. मोहिउद्दीन अशरफ अशरफीउल जिलानी मखदूम साहब का करीब 900 वर्ष पुराना खिरका मुबारक पहनकर आस्ताने पर आकर खिरकापोशी की रस्म को अंजाम दिया। इस मौके उन्होंन रस्मे गागर भी अदा किया गया।
उर्स के सबसे महत्वपूर्ण दिन 28 मोहर्रम की शाम खिरकापोशी के दौरान पूर्व सज्जादानशीन स्व. फखरुद्दीन अशरफ के पुत्र जानशीन फखरुल मशायख सै. मोहामिद अशरफ उर्फ शारिक मियां ने उर्स में आए हुए देश भर के जायरीनों, देश की खुशहाली व विश्व शांति के लिए खास दुआएं मांगी।
इंतेजामिया कमेटी के प्रमुख सदस्य सै. अजीज अशरफ ने बताया कि हजरत मखदूम अशरफ को तोहफा व उपहार मिली हुई टोपी पहनकर हाथ में छड़ी मुबारक लेकर व अन्य वस्तुओं को धारण करके सज्जादानशीन व मुतवल्ली सै. मोहिउद्दीन अशरफ आस्ताने पर आए हुए थे। यहां पहुंचने पर अहले खानदान, ओलमा, मशायख, खुद्दाम, मुजाविरीन और अकीदतमंद उनका इस्तकबाल किया। मौलाना मेराज अशरफ एडवोकेट, सै. खलीक अशरफ व नौशाद खां अशरफी ने सूफी संत हजरत मखदूम अशरफ की शान में उर्स पर विशेष तकरीरें कीं। मंगलवार सुबह से लेकर शाम चार बजे दरगाह के आस्ताने पर मखदूम अशरफ ओरिएंटल कालेज के डिग्रीधारी छात्रों के लिए जलसए दस्तारबंदी समारोह भी आयोजित हुआ। रात 9 बजे से लेकर देर रात हुई विशेष फकीरी कव्वाली महफिले समां में सज्जादानशीन सै. मोहिउद्दीन अशरफ ने सहभागिता की। 28 मोहर्रम को उर्स पर हुए विविध कार्यक्रमों में सै. अजीज अशरफ, सै. फैजान अहमद चांद, खलीक अशरफ, शेखू मियां, अकील अशरफ, मौलाना वली अशरफ अच्छू मियां, मास्टर कयामुद्दीन, डा. जेया अशरफ, फहद अशरफ, मेराज अहमद, मुजीब अहमद सोनू, बुजुर्ग सपा नेता रईस अहमद समेत अन्य लोग शामिल रहे।
बिहार व यूपी के मंत्री उर्स में हुए शामिल: उर्स के सबसे महत्वपूर्ण दिन किछौछा दरगाह के आस्ताने पर रस्मे खिरकापोशी और दुआ के कार्यक्रम में बिहार, यूपी समेत दो मंत्रियों ने सहभागिता की। खचाखच भरे आस्ताने पर उर्स में शामिल होते हुए बिहार सरकार के अल्पसंख्यक कैबिनेट मंत्री मो. जमा खान ने संबोधित करते हुए कहा कि सूफी संत हजरत मखदूम अशरफ की दरगाह भारत की एकता, अखंडता व धर्मनिरपेक्षता का प्रतीक है। उप्र सरकार के अल्पसंख्यक कल्याण, मुस्लिम वक्फ राज्यमंत्री दानिश आजाद अंसारी ने दुआएं मांगते हुए कहा कि इस दरगाह पर जो भी बूढे़ लोग, महिलाएं से लेकर जो बीमार व परेशान हाल लोग आए हैं, या मखदूम अशरफ सब की हाजतों को पूरा फरमाएं।






































