अंबेडकरनगर। 09 जुलाई, 2026
खलीफाए शैखुल हिंद रईसुल फोकरा अलहाज गनी दार शाह एक खुशमिजाज, हरदिल अजीज, काफी मिलनसार और विनम्र व्यक्तित्व के स्वामी थे। आपका व्यक्तित्व आम लोगों के बीच किसी परिचय का मोहताज नहीं है। आप दिल से और अपने अमल व किरदार से उलमा-ए-कराम, मशाइख-ए-इजाम और अपने अजीज व अकारिब (रिश्तेदारों) की बहुत कद्र करते थे और बुजुर्गाने-दीन से सच्ची मोहब्बत रखते थे।
जब भी आप दरगाह शरीफ दयार-ए-मखदूम अशरफ तशरीफ लाते, तो नंगे पांव आते थे। इससे पता चलता है कि आप हुजूर मखदूम अशरफ जहांगीर सिमनानी रह. अलैह से कितनी गहरी अकीदत और मोहब्बत रखते थे। आप अपनी जिंदगी में हर साल 24 मुहर्रमुल हराम को बाबा मलंग शाह के मजार पर फोकराओं (फकीरों) की मौजूदगी में चादर व संदलपोशी की रस्म अदा करते रहे। फिर 24 मुहर्रम से 30 मुहर्रम तक फकीरों और मलंगों के साथ सज्जादगान-ए-आस्ताना-ए-आलिया की खिरकापोशी समेत रसूमात अदायगी में अहम किरदार निभाया करते थे।
आपके इंतकाल के बाद, अब ये सारी रस्में आपके बड़े साहबजादे मोहम्मद आलम शाह अपने वालिद-ए-बुजुर्गवार के नक्श-ए-कदम पर चलते हुए बाहुस्नोखूबी अदा करते चले आ रहे हैं। मो. कलाम शाह ने बताया कि 24 मोहर्रम यानी 10 जुलाई को शाम 4 बजे बाबा मलंग शाह के मजार से जानशीन आलम शाह की अगुआई में फोकराओं का जुलूस निकलेगा। आस्ताने पर रस्मे गागर और चादरपोशी होगी। दुआएं भी मांगी जाएगी। डा. मोहम्मद अकरम ने बताया कि 24 मोहर्रम को होने वाले सभी रसूमात की तैयारी पूरी कर ली गई है।








































