अंबेडकरनगर। 12 मार्च, 2025
नौशाद खां अशरफी ( वरिष्ठ पत्रकार )
सऊदी अरब के अलहसा अल हुलैला शहर में काम करने गए एक व्यक्ति की बीमारी के कारण मौत हो गई। मौत के बाद वहां के मर्चरी हाउस में 20 दिनों तक शव रखा गया थ। भारतीय एंबसी व सऊदी अरब के लोकल ऑथरिटी समेत विधिक प्रक्रिया को पूर्ण कराने के लिए कोई ढूंढे नहीं मिल रहा था। अंततः सोशल एक्टिविस्ट सै. आबिद हुसैन उर्फ बजरंगी भाईजान का प्रयास रंग लाया और मौत के 21 वें दिन मंगलवार शाम को मृतक व्यक्ति का अंतिम संस्कार ( सऊदी अरब ) किया गया।
जिले के थाना आलापुर इंदईपुर बाजार के निवासी नसीर अंसारी उर्फ राजा के रिश्तेदार अतीक अहमद ( 45 वर्ष ) पुत्र अजीज अहमद जो मूलतः अयोध्या जिले के राठ हवेली के पास दीवानी मिसिल दिल्ली दरवाजा के रहने वाले थे। अतीक अहमद आजाद वीजा में सऊदी अरब के अलहसा अल हुलैला शहर में काम करते थे। बीमारी के कारण इसी 19 फरवरी को ही उनकी वहां मौत हो गई। मृतक अतीक के मां, पिता, भाई का बहुत पहले ही निधन हो चुका है। मृतक के एक पुत्री व पुत्र समेत दो नाबालिग बच्चे भी हैं। परिवार में कोई वारिस न मिल पाने के कारण 19 फरवरी से ही अलहसा अल हुलैला शहर के शव गृह में ही मृतक अतीक की लाश रखी गई थी। सऊदी अहलकार भी विधिक अड़चनों को दूर करने के लिए परेशान चल रहे थे।
खास बात यह है कि मृतक के रिश्तेदार इंदईपुर बाजार के निवासी नसीर अंसारी उर्फ राजा ने किसी तरह गृह जनपद के बसखारी थाना क्षेत्र के रुद्रपुर भगाही निवासी इंडियन सोशल एक्टिविस्ट सै. आबिद हुसैन उर्फ बजरंगी भाईजान से संपर्क स्थापित किया। आबिद हुसैन ने नसीर अंसारी से मृतक का पासपोर्ट, अकामा, वीजा, पॉवर ऑफ अटार्नी ( अधिकार पत्र ) समेत अन्य जरूरी कागजात/दस्तावेज प्राप्त किया। इसके उपरांत 25 फरवरी को भारतीय दूतावास के डेथ सेक्शन के हेड/सचिव जसविंदर सिंह को आबिद हुसैन ने सभी महत्वपूर्ण कागजात समेत प्रकरण को सौंपा। सऊदी अरब के लोकल ऑथरिटी से वार्ता करने के बाद 27 फरवरी को जसविंदर सिंह ने आबिद हुसैन को विधिक प्रक्रिया से अवगत कराया। आखिरकार आबिद हुसैन का प्रयास रंग लाया और सभी विधिक समेत अन्य जरूरी औपचारिकताएं 11 मार्च सुबह तक पूरी हो गईं। यह आबिद हुसैन की कड़ी मशक्कत व मेहनत का ही परिणाम था कि 11 मार्च की शाम को सऊदी अरब के अलहसा अल हुलैला शहर में कई भारतीय व अरब के लोगों की मौजूदगी में ही मृतक अतीक के शव को मौत के बाद 21 वें दिन सुपुर्द-ए-खाक किया गया। मृतक अतीक के रिश्तेदार व परिजनों के लिए मसीहा बने आबिद हुसैन ने बताया कि सऊदी अरब के अहलकारों के माध्यम से 2400 रियाल ( 55,200 रु. भारतीय मुद्रा ) मृतक के परिजनों को राहत राशि के तौर पर मिलेंगे। इसकी प्रक्रिया अभी जारी है।
खाड़ी देशों में रह रहे 800 भारतीयों की रिहायी में निभाई अहम भूमिका
जिले के रुद्रपुर भगाही निवासी इंडियन सोशल एक्टिविस्ट सै. आबिद हुसैन उर्फ बजरंगी भाईजान सन् 2015 से ही भारतीय लोगों को अपनी निःशुल्क सेवाएं दे रहे हैं। बजरंगी भाईजान ने बताया कि अब तक 150 मृतक लोगों के शवों को भारत लाने और खाड़ी के देशों में अंतिम संस्कार कराने में महत्वपूर्ण भूमिका वे निभा चुके हैं। लगभग 800 भारतीय जो खाड़ी के विभिन्न देशों में काम कर रहे थे, उनकी रिहाई से लेकर वतन वापसी ( भारत ) में अहम किरदार निभाया।
