अंबेडकरनगर। 05 फरवरी, 2026
भले ही अंबेडकरनगर के विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी एक दलित सभासद की निर्ममतापूर्वक पिटाई के मामले में किछौछा चेयरमैन को दोषसिद्ध अभियुक्त मानते हुए एससी/एसटी एक्ट में तीन वर्ष की सजा सुना दें तथा अर्थदंड से भी दंडित कर दें। इसके बाद किछौछा चेयरमैन हाईकोर्ट की शरण में चले जाएं और वहां से भी एससी/एसटी कोर्ट के आदेश के खिलाफ कोई स्टे न मिले लेकिन चेयरमैन की सेहत पर इसका कोई फर्क नहीं पड़ता।
वर्तमान समय में ओंकार गुप्ता अपने को अध्यक्ष मानते हुए अपनी दबंगई और गुंडागर्दी के बलबूते जबरन न सिर्फ नगर पंचायत कार्यालय में प्रवेश कर रहे हैं बल्कि संविधान और कानून में दी गई व्यवस्थाओं को ठेंगा दिखाते हुए निकाय की बोर्ड की बैठक भी करवा रहे हैं। खास बात यह है कि बोर्ड की बैठक से पहले जो एजेंडा पत्र/बैठक सूचना पत्र घुमाया जाता है उस एजेंडा पत्र पर ईओ संजय जैसवार भी अपना हस्ताक्षर कर चुके हैं। इस एजेंडा पत्र पर चेयरमैन ओंकार गुप्ता, मीरा रानी, रामजी, प्रदीप कुमार, ज्योति गुप्ता, अमन गुप्ता समेत कई सभासदों के हस्ताक्षर भी मौजूद मिले हैं।
कानून के जानकारों का मानना है कि ओंकार गुप्ता के पास अध्यक्ष के तौर पर जब कोई विधिक अधिकार नहीं है ऐसे में वह जबरन बोर्ड की बैठक करवा रहे हैं तो ईओ संजय जैसवार को इससे दूरी बना लेनी चाहिए थी। मगर गुरुवार को ऐसा नहीं हुआ। गुरुवार को बोर्ड की बैठक में कुछ सभासदों के साथ ही ईओ संजय जैसवार ने भी स्वयं भाग लिया। कानून के जानकारों का मानना है कि अगर ओंकार गुप्ता जबरन अध्यक्ष के तौर पर बोर्ड की बैठक करवा रहे हैं तो इसकी लिखित या मौखिक सूचना ईओ के द्वारा उपजिलाधिकारी टांडा, अपर जिलाधिकारी वित एवं राजस्व, जिलाधिकारी से लेकर शासन को दी जानी चाहिए थी। मगर ओंकार गुप्ता के गलत कृत्यों में ईओ किछौछा उनके मेली मददगार के रूप में शामिल हो रहे हैं।
उधर, दलित सभासद विनोद कुमार का कहना है कि ओंकार गुप्ता को हाईकोर्ट से कोई राहत न मिलने संबंधी अदालती कागजात व डीएम को प्रशासक नियुक्त करने संबंधी प्रार्थना पत्र भी उन्होंने ईओ संजय जैसवार को दिया है। सभासद विनोद कुमार का कहना है कि क्यों ईओ पार्टी बन कर कार्य कर रहे हैं यह बात समझ से परे हैं। सभासद विनोद कुमार ने यह भी बताया कि बुधवार को उन्होंने एसडीएम टांडा डा. शशि शेखर से मुलाकात भी की थी। मुलाकात के दौरान अदालत से दोषसिद्ध अभियुक्त ओंकार गुप्ता के किछौछा नगर पंचायत में प्रवेश पर रोक लगाने संबंधी एक प्रार्थना पत्र भी दिया था। लेकिन एसडीएम ने यह पत्र लेने से इंकार कर दिया।
वर्तमान समय में चेयरमैन होने का कोई विधिक अधिकार न होने के बावजूद ओंकार गुप्ता खुद अपने को अध्यक्ष की तरह दर्शा कर कार्य कर रहे हैं जो विधि विरुद्ध व असंवैधानिक है। शायद प्रशासनिक अहलकारों के द्वारा कोई बोल्ड स्टेप न लिए जाने से ही दोषसिद्ध अभियुक्त ओंकार गुप्ता के हौसले काफी बुलंद है।










































