अंबेडकरनगर। 08 जनवरी, 2026
जनपद न्यायालय के विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी एक्ट राम विलास सिंह के एक आदेश से किछौछा नगर पंचायत के चेयरमैन की मुश्किलें बढ़ गईं हैं। गुरुवार को दो साल पूर्व दलित सभासद की बोर्ड की बैठक के दौरान निर्ममतापूर्वक पिटाई के मामले में कोर्ट ने अर्थदंड के साथ तीन साल की सजा चेयरमैन को सुनाया है। अदालत के इस फैसले के बाद संभवतः चेयरमैन की कुर्सी पर फिलहाल खतरा मंडराने लगा है।
खास बात यह है कि 28 दिसंबर 2023 को किछौछा नगर पंचायत की बोर्ड की बैठक के दौरान अध्यक्ष ओंकार गुप्ता ने वार्ड नंबर 3 ( मुजफ्फरनगर ) के दलित सभासद विनोद कुमार की मेज पर लिटा कर निर्ममतापूर्वक पिटाई की थी। पिटाई का वीडियो सोशल मीडिया पर बहुत तेजी से वायरल हुआ था। पीड़ित सभासद विनोद कुमार की तहरीर पर बसखारी पुलिस ने अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति नृशंता निवारण अधिनियम और आईपीसी की धारा 323, 504, 506 में मुकदमा दर्ज किया था। इसके उपरांत करीब दो वर्षों से यह मामला विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी एक्ट राम विलास सिंह के यहां चल रहा था।
8 जनवरी 2026 को न्यायालय ने 323, 504, 506 आईपीसी के मामले में दो वर्ष के साधारण कारावास एवं मु0 2000/रुपए के अर्थदंड से दंडित किया है। अर्थदंड अदा न करने की दशा में अभियुक्त ओंकार गुप्ता को 20 दिन के अतिरिक्त साधारण कारावास की सजा भुगतनी होगी।
दोषसिद्ध अभियुक्त ओंकार गुप्ता को धारा 3 (1) द, ध एससी/एसटी एक्ट के तहत 3 वर्ष के साधारण कारावास एवं मु0 3000/रुपए के अर्थदंड से दंडित किया गया है। अर्थदंड अदा न करने की दशा में अभियुक्त को एक माह के अतिरिक्त साधारण कारावास की सजा भुगतनी होगी।
अदालत के आदेश के मुताबिक अभियुक्त द्वारा जेल में बितायी गई अवधि नियमानुसार सजा में समायोजित होगी। सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी। इसके अलावा कोर्ट ने अभियुक्त ओंकार गुप्ता का सजायावी वारंट बनाए जाने का आदेश भी दिया है।
कानून के जानकारों का मानना है कि भारत में लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 के अंतर्गत यह प्रावधान है कि यदि किसी व्यक्ति को कोर्ट द्वारा किसी अपराध में दोषी ठहरा कर कम से कम 2 वर्ष की सजा दी जाती है तो वह उस तारीख से ही अयोग्य माना जाता है यानी वह चुनाव लड़ने या किसी निर्वाचित पद पर बने रहने के योग्य नहीं रहता। यह अयोग्यता सजा की अवधि समाप्त होने के बाद भी 6 वर्ष तक जारी रहती है यानी रिहाई के बाद भी 6 साल तक। यह नियम आमतौर पर सांसद/विधायक जैसे पदो ंके लिए स्पष्ट रूप से लागू होता है।
उधर, अगर किसी नगर पंचायत अध्यक्ष को अदालत के द्वारा 3 साल या उससे अधिक की कैद की सजा सुनायी जाती है तो वह अपने पद को खो सकता है या उस पर बने रहने में अयोग्य हो सकता है। विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी एक्ट राम विलास सिंह के तरफ से चेयरमैन ओंकार गुप्ता को 3 साल की सजा सुनाने के बाद अब जिला प्रशासन की ओर लोगों की निगाहें टिकी हुईं हैं। अब आने वाला समय ही बताएगा की ओंकार गुप्ता की चेयरमैन की कुर्सी रहेगी या जाएगी।








































