अंबेडकरनगर। 11 अप्रैल, 2026
अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त किछौछा दरगाह में सूफी संत हजरत मखदूम अशरफ का 640 वां दो दिवसीय सालाना गुस्ल मुबारक शुक्रवार भोर में संपन्न हो गया। इस मौके पर देश में खुशहाली, विश्व शांति के लिए दुआएं मांगी गई। गुस्ल के मौके पर दरगाह की फिजाओं में गुलाब व केवड़ा जल की खुशबू उड़ती रही। कार्यक्रम का समापन होते ही देश के विभिन्न प्रांतो-शहरों से आए हुए जायरीनों/श्रद्धालुओं ने अपने-अपने घरों को लौटना शुरू कर दिया है।
किछौछा दरगाह के आस्ताने पर गुस्ल मुबारक के मद्देनजर विशेष जलसा गुरुवार रात 9 बजे से शुरू हुआ। देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए मौलानाओं, ओलमाओं समेत वक्ताओं ने जलसे को संबोधित किया। सभी वक्ताओं ने अपने संबोधन में प्रसिद्ध सूफी संत हजरत मखदूम अशरफ की विश्व शांति, मानवता व इंसानी हमदर्दी को समर्पित उनके जीवन पर विस्तार से रोशनी डाली। नातखांओं व शायरों ने नबी की शान में नातिया कलाम और हजरत मखदूम अशरफी शान में कसीदे पढ़े। गुरुवार देर रात को जलसे का समापन हुआ। गुस्ल मुबारक के विशेष जलसे के अंत में सज्जादानशीन सै. मोहिउद्दीन अशरफ की मौजूदगी में जानशीन सै. मोहामिद अशरफ उर्फ शारिक मियां ने आए हुए जायरीनों और मुल्क की खुशहाली के लिए खास दुआएं मांगी। भोर में करीब तीन दरगाह का गेट खोला गया। इसके बाद सज्जादानशीन सै. मोहिउद्दीन अशरफ व सै. मोहामिद अशरफ “ शारिक मियां ” तथा खानवादए अशरफिया के लोगों ने पहुंच कर सूफी संत हजरत मखदूम अशरफ के मजार मुबारक ( समाधि ) को 40 घड़ा केवड़ा व गुलाब जल से गुस्ल कराया। हजारों जायरीनों ने ऐतिहासिक दरगाह की दीवारों पर गुलाब व केवड़ा जल से छिड़काव किया। जिससे चारों ओर फिजाओं में खुशबू फैल गई। इंतेजामिया कमेटी के तरफ से जायरीनों में गुस्ल मुबारक का जल प्रसाद के तौर पर बांटा गया। शुक्रवार की साप्ताहिक जुमे की विशेष नमाज दरगाह की सभी मस्जिदों में अदा की गई। नमाज के बाद संदलपोशी और गुलपोशी की रस्म को अंजाम दिया गया। गुस्ल मुबारक के विविध कार्यक्रमों में सै. अजीज अशरफ, सै. मेराज अशरफ एडवोकेट, बदीउद्दीन अशरफ, सै. खलिक अशरफ, डा. सै. शहाब अशरफ समेत अन्य लोग मुख्य रूप से मौजूद रहे।











































