अंबेडकरनगर। 26 मार्च, 2025
पीलीभीत सदर के पूर्व विधायक व कई बार एमएलसी रहे किछौछा निवासी धर्मगुरु मौलाना सै. अली अशरफी मियां को किछौछा दरगाह के निजी कब्रिस्तान परिसर में बुधवार देर शाम को सुपुर्दे खाक किया गया। नमाजे जनाजा और अंतिम संस्कार में देश के विभिन्न क्षेत्रों के उनके अनुयायी और भारी संख्या में लोगों ने सहभागिता की।
पूर्व विधायक व धर्मगुरु मौलाना सै. अली अशरफी मियां पिछले कुछ दिनों से बीमार चल रहे थे। देर रात को लखनऊ के गोमती नगर में आवास पर उनका देहांत हो गया था। वे करीब 85 वर्ष के थे। सड़क मार्ग से उनका शव किछौछा दरगाह के खानकाह सरकारे कलां में लाया गया और बुधवार शाम को उन्हें गुस्ल दिया गया। खानकाह सरकारे कलां में मगरिब ( शाम 6.15 ) की नमाज के जनाजे की नमाज पढ़ाई गई तथा इसके बाद किछौछा दरगाह के कब्रिस्तान पांचों पीर परिसर में उनके शव को लाया गया। इसी कब्रिस्तान परिसर में उन्हें सुपुर्दे खाक किया गया।
पीएम इंदिरा गांधी व मुलायम सिंह के बेहद करीबी थे धर्मगुरु मौलाना सै. अली अशरफी मियां
मौलाना सै. अली अशरफी मियां 1980 से कांग्रेस पार्टी से एमएलसी रहे। पीलीभीत सदर से 1985 से लेकर 1989 तक विधायक रहे। इंदिरा गांधी के प्रधानमंत्री रहने के दौरान अशरफी मियां की काफी शोहरत व एक अलग पहचान थी। तत्कालीन पीएम इंदिरा गांधी ने उन्हें विधान परिषद सदस्य बनाया था। राजीव गांधी सरकार का विरोध करने वाले सभी मध्यमार्गी दल एक साथ आए। जनमोर्चा, जनता दल, कांग्रेस ( एस ) को एक साथ मिलाकर विलय होने के बाद नए राजनीतिक दल जनता दल की स्थापना की गई। जनता दल के संस्थापक सदस्यों में अशरफी मियां का शुमार था। वीपी सिंह जनता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए गए। वीपी सिंह से अलग होने के बाद मुलायम सिंह यादव ने नई पार्टी सपा का गठन किया। मुलायम सिंह ने यूपी सीएम रहते हुए मौलाना सै. अली अशरफी मियां को आवास निगम का चेयरमैन भी बनाया था।
