अंबेडकरनगर। 17 जुलाई, 2026
अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त किछौछा दरगाह में सूफी संत हजरत मखदूम अशरफ के 640 वें वार्षिक पर गुरुवार शाम को देशभर से आए फोकराओं के लिए आयोजित कार्यक्रम “दाखौल” के समापन के साथ ही उर्स औपचारिक रूप से खत्म हो गया।
किछौछा दरगाह के सबसे मुख्य स्थान आस्ताने पर गुरुवार शाम को सज्जादानशीन सै. मोहिउद्दीन अशरफ की मौजूदगी में “दाखौल” कार्यक्रम शुरू हुआ। इस मौके पर जायरीनों का सैलाब इस कदर उमड़ा कि मानो पैर रखने की कहीं जगह नहीं थी। संयोग से गुरुवार का दिन नौचंदी मेले का भी दिन था। दाखौल कार्यक्रम में देश के विभिन्न प्रांतो-शहरों से आए फोकराओं ने मोहम्मद आलम शाह की अगुआई में अपनी विपदा और दर्द भरी दास्तां सज्जादमशीन सै. मोहिद्दीन अशरफ को सुनाया। सज्जादानशीन ने रस्म के मुताबिक इन फोकराओं का मार्गदर्शन किया और सही रास्ते पर चलने के लिए उन्हें हिदायतें दी। खास बात यह है कि इस अवसर पर फोकराओं ने दुआ पढ़कर यह ऐलान किया कि अब इस साल के उर्स का समापन हो गया है और सारे कार्यक्रम स्थगित किया जा रहे हैं।
दाखौल के समापन के बाद सूफी संत हजरत मखदूम अशरफ का खिरका मुबारक किछौछा दरगाह से बसखारी ले जाया गया। दरगाह के पूर्व सज्जादानशीन सै. फखरुद्दीन अशरफ के आवास पर स्थित तबर्रुक की कोठरी में मखदूम साहब का 900 वर्ष पुराना खिरका मुबारक को सील करके रखा गया।
इसके पूर्व 28 मोहर्रम की रात में आस्ताने पर हुए महफिले समा में मशहूर कव्वाल रईस अनीस साबरी ने
अपनी खास शैली में बेहतरीन कव्वाली की प्रस्तुति दी और लोगों को झूमने पर मजबूर कर दिया। महफिले समा में जानशीन फखरुल मशायख सै. मोहामिद अशरफ उर्फ शारिक मियां ने सहभागिता की। महफिले समा में मौलाना अनीस अशरफ, सै. अजीज अशरफ भी मौजूद रहे।





































