लखनऊ। गोमती पुस्तक महोत्सव-2026 के तहत गुरुवार को लखनऊ विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित विशेष सत्र ‘कूटनीति से नेतृत्व तक-राष्ट्र सर्वोपरि’ में दिल्ली के उपराज्यपाल एवं प्रतिष्ठित राजनयिक सरदार तरनजीत सिंह संधू ने विद्यार्थियों से संवाद किया। उन्होंने कहा कि पढ़ने की आदत, कौशल विकास, अनुशासन और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी की भावना युवाओं को देश के विकास में प्रभावी योगदान देने के लिए तैयार करती है। उन्होंने विद्यार्थियों से असफलताओं से सीखने और निरंतर आगे बढ़ने का आह्वान किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ वंदे मातरम् और राष्ट्रगान के साथ हुआ। राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत के निदेशक श्री युवराज मलिक ने सरदार तरनजीत सिंह संधू और लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जयप्रकाश सैनी का शॉल ओढ़ाकर एवं पुस्तकें भेंट कर स्वागत किया। इस अवसर पर संधू के जीवन और सार्वजनिक योगदान पर आधारित वीडियो भी प्रदर्शित की गई।
डिग्री के साथ कौशल और तकनीक की समझ जरूरी
संधू ने अपने 36 वर्ष के विदेश सेवा अनुभव साझा करते हुए कहा कि तेजी से बदलती दुनिया में केवल डिग्री पर्याप्त नहीं है। युवाओं को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप कौशल विकसित करने चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत की युवा आबादी देश की महत्वपूर्ण शक्ति है, जिसे सही अवसरों से जोड़ना जरूरी है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता के संदर्भ में उन्होंने विद्यार्थियों से तकनीक का विवेकपूर्ण उपयोग करने और अपनी सोच व निर्णय क्षमता को बनाए रखने की सलाह दी। उन्होंने पढ़ाई के साथ खेलों से जुड़ने तथा टीम भावना और अनुशासन विकसित करने पर भी जोर दिया। संधू ने सरदार तेजा सिंह समुंदरी के जीवन का उल्लेख करते हुए विद्यार्थियों से प्रेरणादायी व्यक्तित्वों के बारे में पढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने प्रेमचंद और भगवती चरण वर्मा जैसे साहित्यकारों का उल्लेख करते हुए कहा कि आधुनिक कौशल के साथ भारतीय साहित्य, संस्कृति और मूल्यों से जुड़ाव भी जरूरी है।
पुस्तकों का अनावरण और प्रतिभागियों का सम्मान
कार्यक्रम में मंचस्थ अतिथियों ने राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत द्वारा प्रकाशित तीन पुस्तकों का अनावरण किया—‘तमिल कहानियाँ (पंजाबी)’, ‘हरि सिंह नलवा’ और ‘वीह विस्वे (पंजाबी)’। आयोजन में योगदान देने वाले श्री चंद्र प्रकाश, प्रो. रोली मिश्रा और सुश्री सांत्वना तिवारी तथा विभिन्न गतिविधियों में भाग लेने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया।
किशोर साहित्य और वित्तीय जागरूकता पर चर्चा
महोत्सव के सत्र ‘किशोर मन और साहित्य : नए पाठकों की, नई दुनिया’ में डॉ. अमिता दुबे, डॉ. कुमकुम शर्मा और प्रो. सूर्य प्रसाद दीक्षित ने किशोरों की बदलती पाठकीय रुचियों और उनके अनुरूप साहित्य सृजन पर विचार साझा किए। सत्र का समन्वय अरुण सिंह ने किया।वित्तीय जागरूकता सत्र में संजीव त्रिपाठी, विशाल आर्या और श्रुति शर्मा ने इक्विटी, डेट, हाइब्रिड फंड, म्यूचुअल फंड, SIP और NSDL की बुनियादी जानकारी दी। निवेश से पहले जोखिम और वित्तीय क्षमता समझने तथा किसी व्यक्ति या संस्था को पैसा देने से पहले उसके अधिकृत होने की जांच करने की सलाह दी गई।
ग़ज़ल और पॉप संगीत से सजी सांस्कृतिक संध्या
सांस्कृतिक संध्या में गजल गायक मिथिलेश लखनवी ने फरमाइश पर ग़ज़लें प्रस्तुत कीं। ‘चौदहवीं का चांद’ और ‘दमादम मस्त कलंदर’ जैसी प्रस्तुतियों को दर्शकों ने सराहा। उनके साथ तबले पर रत्नेश मिश्रा, गिटार पर राकेश आर्या, कीबोर्ड पर रिंकू राज और ऑक्टोपैड पर विकास कुमार ने संगत दी। वहीं, पॉप आर्टिस्ट नैना लायल ने अपनी विशिष्ट आवाज और ऊर्जावान प्रस्तुति से दर्शकों का मनोरंजन किया। पॉप और सूफियाना अंदाज़ की उनकी प्रस्तुतियों का दर्शकों ने तालियों के साथ स्वागत किया।









































