अंबेडकरनगर। 27 जनवरी, 2026
जिले के अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त किछौछा दरगाह शरीफ के निकट पूराबजगौती में अदबी दुनिया फाउंडेशन के बैनर तले गणतंत्र दिवस की रात में ऑल इंडिया मुशायरा व कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ। शायर व हकीम हसन वारसी के संयोजकत्व में वरिष्ठ अधिवक्ता अब्दुल मजीद अंसारी के जेरे सरपरस्ती व सभासद दस्तगीर अंसारी की अध्यक्षता में हुए कार्यक्रम का संचालन मुख्तार मासूम आजमी ने किया।
मुख्य अतिथि के रूप में पत्रकार नौशाद खां अशरफी ने ऑल इंडिया मुशायरा व कवि सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि देश के स्वतंत्रा के समय यानी सन् 1947 में आजादी के महापुरुषों, नायकों ने गंगा जमुनी तहजीब व राष्ट्रीय एकता, अखंडता की बुनियाद रखी जो आज भी देश में कायम है। विरासत में मिली इस तहजीब को कोई खत्म नहीं कर सकता। इसके बाद शायरों व कवियों ने अपनी शायरी व कविताओं के माध्यम से समां बांधना शुरू किया।
जावेद सुल्तानपुरी ने जैसे ही अशआर पढ़ा कि मैं ने ज़रूरतों के लिए बेच दी हयात लेकिन मेरे वतन तेरा सौदा नहीं किया को खूब शाबाशी मिली। डा. हसीन भादवी ने कलाम पढ़ा कि ये रूह कह रही है भगत सिंह की बार-बार, सीखें वतन परस्ती को अब्दुल हमीद से को काफी सराहा गया। सबसे बुजुर्ग शायर व कवि अभिमान सिंह ख़ाक सुल्तानपुरी ने पढ़ा कि रहे ये ज़िन्दगी जब तक करूं मैं देश की सेवा, मरूं तो देश के हित में यही अरमान मेरा है। गुलज़ार सिकंदर पुरी ने तिरंगा की शान में पढ़ा कि तिरंगा इसलिए बांधा है सर पर, वतन पर जां लुटाना चाहता हूं। कैफ सिकंदरपुरी ने यह पंक्तियां पढ़ी कि सारी दुनिया ने फक्त काम निकाला अपना, किसने मजदूर के माथे का पसीना देखा। साहिल मुबारक पूरी ने अशआर पढ़ा कि अपने वतन की शान बढ़ाते रहेंगे हम, दिल चिज़ क्या है जान लुटाते रहैगे हम। रफीक कुरैशी आजमी, कदीर अंजुम किछौछवी समेत विभिन्न शायरों व कवियों ने देश की राष्ट्रीय एकता व अखंडता पर शायरी व कविताएं पेश कीं।
इन हस्तियों को मिला अवार्ड : ऑल इंडिया मुशायरा व कवि सम्मेलन के दौरान पत्रकार नौशाद खां अशरफी को डा. एपीजे अब्दुल कलाम अवार्ड, सभासद दस्तगीर अहमद को सभासद डा. मुख्तार अंसारी अवार्ड, वरिष्ठ अधिवक्ता अब्दुल मस्जिद अंसारी को हसरत मोहानी अवार्ड, मुख्तार मासूम आजमी को सिराजुद्दौला अवार्ड, बुजुर्ग शायर व कवि अभिमान सिंह खाक सुल्तानपुरी को सरदार भगत सिंह अवार्ड, रफीक कुरैशी आजमी को अल्लामा फाजले हक खैराबादी अवार्ड, साहिल मुबारकपूरी को मौलवी अहमदुल्लाह फैजाबादी अवार्ड समेत अन्य हस्तियों को अलग-अलग अवार्ड से सम्मानित किया गया।









































