लखनऊ : कवियों, कहानीकारों और महान विद्वानों की परंपरा के लिए प्रसिद्ध लखनऊ एक बार फिर उत्तर भारत के साहित्यिक परिदृश्य के केंद्र में अपनी विशिष्ट उपस्थिति दर्ज करवाने के लिए तैयार है। राष्ट्रीय पुस्तक न्यास की ओर से गोमती पुस्तक महोत्सव के पाँचवें संस्करण का आयोजन 12 से 20 सितंबर 2026 तक लखनऊ विश्वविद्यालय में किया जा रहा है। नौ दिनों तक चलने वाला यह महोत्सव पुस्तकों, साहित्यिक संवादों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का ऐसा भव्य आयोजन होगा, जिसके विराट उपस्थिति बाद तक भी महसूस की जाएगी।
11 सितंबर को लखनऊ विश्वविद्यालय के एपी सेन सभागार में आयोजित प्रेस वार्ता में राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत के निदेशक श्री युवराज मलिक, लखनऊ विश्वविद्यालय की प्रोफेसर रोली मिश्रा (विभागाध्यक्ष, अर्थशास्त्र विभाग एवं प्रधान पुस्तकालयाध्यक्ष) ने इस सम्बन्ध में जानकारी दी। पत्रकारों को संबोधित करते हुए सर्वप्रथम प्रो रोली मिश्रा ने कहा कि यह लखनऊ विश्वविद्यालय के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है कि राष्ट्रीय पुस्तक न्यास के सहयोग से विश्वविद्यालय में इतना बड़ा आयोजन होने जा रहा है। पठन-पाठन की संस्कृति को संवर्द्धित करने के राज्य सरकार एवं केंद्र सरकार के साझा सहयोग से ही यह संभव होने जा रहा है। माननीय राज्यपाल के मार्गदर्शन में हम ‘पढ़े लखनऊ, बढ़े लखनऊ’ और ‘पढ़े विश्वविद्यालय, बढ़े विश्वविद्यालय’ के लक्ष्य को आगे बढ़ाते हुए अब एनबीटी के सहयोग से भव्य गोमती पुस्तक महोत्सव के साक्षी बनने जा रहे हैं। यह अच्छी किताबों और अच्छे लेखकों से साक्षात्कार का भी अवसर होगा, और हमें प्रेरित करेगा कि हम भविष्य में एनबीटी के साथ मिलकर और भी आयोजन करें।
राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत के निदेशक युवराज मलिक ने कहा कि गोमती पुस्तक महोत्सव का यह पांचवां संस्करण है, जो यह दर्शाता है कि यह सबसे लोकप्रिय और स्थापित वार्षिक आयोजनों में से एक बन चुका है। यह महोत्सव पुस्तकों तक सीमित न रहकर युवा लेखकों, वक्ताओं, बुद्धिजीवियों, स्थानीय बहुभाषी रचनाकारों तथा सांस्कृतिक एवं प्रदर्शन कलाओं को भी मंच प्रदान कर रहा है। उन्होंने कहा कि पुस्तकें राष्ट्र निर्माण और अच्छे नागरिक तैयार करने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। उन्होंने बताया कि महोत्सव में बच्चों और जेनजी के लिए प्रतिदिन विभिन्न गतिविधियां और प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी तथा प्रवेश पूरी तरह निःशुल्क रहेगा। निदेशक ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार, एनबीटी, लखनऊ विश्वविद्यालय तथा बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग के सहयोग से आयोजित यह महोत्सव मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पुस्तकालयों और पुस्तक संस्कृति को बढ़ावा देने की मुहिम का हिस्सा है। लखनऊ और गोरखपुर में राष्ट्रीय स्तर के दो बड़े पुस्तक मेलों का आयोजन प्रदेश के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
चंद्र प्रकाश , वरिष्ठ संयोजक, आयोजन समिति , गोमती पुस्तक महोत्सव ने कहा कि एआई यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की एंटीडोट पुस्तकें हैं। क्योंकि इंटरनेट पर जो कुछ भी उपलब्ध है वह न पुष्टिकृति है न कहीं से प्रमाणित है। इसलिए सिर्फ एआई के सहारे आप सही ज्ञान नहीं प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने लोगों से अधिक से अधिक संख्या में गोमती पुस्तक महोत्सव में शामिल होने की अपील की।
गोमती पुस्तक महोत्सव 2026 का शुभारंभ 12 सितंबर को उत्तर प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ करेंगे। उद्घाटन समारोह में लखनऊ विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. जय प्रकाश सैनी, एनबीटी-इंडिया के अध्यक्ष प्रो. मिलिंद सुधाकर मराठे, बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री संदीप सिंह, उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय, माध्यमिक शिक्षा राज्य मंत्री गुलाब देवी, माननीय मुख्यमंत्री के सलाहकार अवनीश के. अवस्थी, बेसिक व माध्यमिक शिक्षा में एसीएस पार्थ सेन शर्मा और एनबीटी-इंडिया के निदेशक युवराज मलिक की विशिष्ट उपस्थिति रहेगी।
माननीय प्रधानमंत्री के भारत को ज्ञान-आधारित समाज बनाने के विजन और ‘मेक इंडिया रीड’ अभियान को आगे बढ़ाते हुए, शिक्षा मंत्रालय के अंतर्गत नेशनल बुक ट्रस्ट-इंडिया द्वारा उत्तर प्रदेश सरकार और लखनऊ विश्वविद्यालय के सहयोग से नौ दिवसीय गोमती पुस्तक महोत्सव 2026 का आयोजन किया जा रहा है। साहित्य, संस्कृति और ज्ञान के इस महाकुंभ में लगभग 250 पुस्तक स्टॉल लगाए जाएंगे। इनमें 121 प्रकाशक शामिल हो रहे हैं, जो हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू, अवधी एवं अन्य भारतीय भाषाओं की हजारों पुस्तकों का प्रदर्शन एवं बिक्री करेंगे। यह केवल पुस्तक महोत्सव नहीं है, बल्कि इसमें समृद्ध परंपराओं और समकालीन सरोकारों का सुंदर समायोजन किया गया है। पुस्तकों के अलावा गोमती पुस्तक महोत्सव में साहित्य, संस्कृति और प्रौद्योगिकी से जुड़े विविध विषयों पर प्रतिष्ठित लेखकों और विशेषज्ञों के साथ संवाद आयोजित किए जाएंगे। इन सत्रों में महिला अस्मिता, युवा साहित्य, सतत विकास, अनुवाद, विरासत एवं लोककथाएँ, अंतरिक्ष एवं विज्ञान तथा आध्यात्मिकता जैसे विषयों पर विशेषज्ञों एवं लेखकों के साथ संवाद किया जाएगा।
इन विशेष संवाद सत्रों में दिल्ली के माननीय उपराज्यपाल श्री तरनजीत सिंह संधू, भारतीय अंतरिक्ष यात्री ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला, प्रसिद्ध लोकगायिका मालिनी अवस्थी, लेखक शांतनु गुप्ता और पद्मश्री से सम्मानित डॉ. विद्या विंदु सिंह सहित विभिन्न क्षेत्रों के अनेक प्रतिष्ठित कलाकार, रचनाकार, विशेषज्ञ एवं लेखक शामिल हो रहे हैं। इन सत्रों में भारत की साहित्यिक विरासत, किशोर साहित्य, अनुवाद, पुस्तक चर्चा और समकालीन पत्रकारिता जैसे विषयों पर भी संवाद किया जाएगा।
लखनऊ के नन्हे पुस्तक-प्रेमियों के लिए नेशनल सेंटर फॉर चिल्ड्रन्स लिटरेचर (नेशनल बुक ट्रस्ट, इंडिया का बाल साहित्य प्रभाग) द्वारा पूरे नौ दिनों के लिए विशेष ‘बाल मंडप’ तैयार किया गया है। अलग-अलग आयु वर्ग के बच्चों के लिए आयोजित इन कार्यक्रमों में कठपुतली नाटक, कमिशिबाई और स्टोरीटेलिंग के माध्यम से कहानी सुनाने, वैदिक गणित, माइंडफुलनेस वर्कशॉप, क्ले आर्ट, पोस्टर निर्माण, सुलेख, कैरिकेचर स्टूडियो, कविता-पाठ, मंडला कला और रचनात्मक लेखन की कार्यशालाएँ भी आयोजित की जाएंगी। इसके साथ ही चित्रकला और क्विज प्रतियोगिताएँ तथा ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला के साथ बच्चों के लिए विशेष संवाद सत्र भी आयोजित किया जाएगा।
महोत्सव में हर रोज शाम को उत्तर प्रदेश की समृद्ध परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को दर्शाने वाले विविध सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए जाएंगे। इनमें पारस बैंड की प्रस्तुति, कथक प्रस्तुतियाँ, बिरजू महाराज कथक संस्थान द्वारा कथक नृत्य-नाटिका ‘रघुवंशम्’, सुगम संगीत की शाम, शंभू शिखर और अन्य शायरों के साथ मुशायरा, लोक प्रस्तुतियाँ, भारतेन्दु नाट्य अकादमी द्वारा नाट्य प्रस्तुति तथा बेगम अख्तर को समर्पित विशेष दास्तानगोई सत्र शामिल हैं। इनके अलावा महोत्सव के दौरान विभिन्न संगीत प्रस्तुतियाँ भी आयोजित की जाएंगी।
पुस्तक महोत्सव में आने वाले बच्चों एवं युवा पाठकों को राष्ट्रीय ई-पुस्तकालय को जानने और उसका उपयोग करने का अवसर भी मिलेगा। यह एक डिजिटल पुस्तकालय मंच है, जहाँ विभिन्न विधाओं और भाषाओं की सात हजार (7,000)
से अधिक ई-पुस्तकों उपलब्ध हैं। पाठकों और विद्यार्थियों से लेकर शिक्षकों और लेखकों तक, गोमती पुस्तक महोत्सव 2026 सभी को लखनऊ की जीवंत साहित्यिक, सांस्कृतिक और रचनात्मक चेतना का उत्सव मनाने के लिए आमंत्रित करता है। आइए, इस महोत्सव का हिस्सा बनें और इसे साहित्य एवं संस्कृति का एक सच्चा महाकुंभ बनाएँ।








































